सागर जिला कृषि, पशुपालन और आधुनिक खेती के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के हजारों किसान परिवारों के जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती आई है। यह कहानी सागर के उसी बदलते स्वरूप और सशक्त होते अन्नदाताओं की है।
प्राकृतिक खेती और रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन
जिले में पारंपरिक खेती के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। 4.05 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि पर 25 क्लस्टरों के जरिए 3,125 किसानों द्वारा 1,250 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस संकल्प का सुखद परिणाम यह रहा कि सागर में खरीफ में 8.88 लाख मीट्रिक टन और रबी में रिकॉर्ड 16.94 लाख मीट्रिक टन का बंपर उत्पादन प्राप्त हुआ है।
किसानों को समय पर और बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। जिले की पारदर्शी ई-टोकन प्रणाली किसानों के लिए वरदान साबित हुई, जिसके माध्यम से 95,908 कृषकों को बेहद सुगमता से 43,441 मीट्रिक टन उर्वरक (खाद) उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को लंबी लाइनों और परेशानियों से मुक्ति मिली।
उन्नत बीज और फसल बीमा का सुरक्षा कवच
खेती की लागत कम करने और बेहतर उत्पादन के लिए रबी सीजन में 4,000 किसानों को 2,450 क्विंटल प्रमाणित बीज बांटे गए। साथ ही, दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए 42,200 किसानों को 3,392 क्विंटल बीज मिनीकिट दिए गए। संकट के समय किसानों को सहारा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2024 में 23,236 किसानों को ₹4.91 करोड़ और रबी 2024-25 में 789 किसानों को ₹6.53 लाख का सीधा भुगतान किया गया।
आधुनिक यंत्रों से स्मार्ट हुई खेती
खेती को सुगम बनाने और पर्यावरण सुधार (पराली प्रबंधन) के लिए जिले में आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। सिंचाई और फसल प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किसानों को 89 हैप्पी सीडर/सुपर सीडर और 648 स्ट्रॉ रीपर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे किसानों का समय और लागत दोनों बच रहे हैं।



