जिले में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों के खेतों का निरीक्षण कर जैविक खेती की तकनीकों का अवलोकन किया गया। इस दौरान पीडी आत्मा श्रीमती अरुणिमा सिंह, सहायक संचालक कृषि सुश्री अभिलाषा चौरसिया एवं कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती आरती चौरसिया ने विभिन्न किसानों की फसलों का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने किसान श्री राजेश मरावी की धान, श्री उमेद मरावी की कोदो, श्री रज्जू सिंह मरको की धान तथा श्री सुरेश सिंह मरावी की कुटकी फसल का निरीक्षण किया। किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के तहत नीमास्त्र एवं जीवामृत जैसे जैविक इनपुट का उपयोग किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान कुछ खेतों में धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग एवं भूरा फुदका का प्रकोप पाया गया। अधिकारियों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं रोग-कीट के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी। भूरा फुदका प्रभावित खेतों में यूरिया के अनावश्यक एवं अधिक उपयोग से बचने, खेत में पानी का स्तर कम रखने तथा अनुशंसित कीटनाशक के उपयोग की जानकारी दी गई।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, जैविक खादों के उपयोग तथा प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को निरंतर अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। विभाग द्वारा जिले में कम लागत, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।

